Namami Gange Yojana 2021 | नमामि गंगे योजना क्या है?

Namami gange yojana | नमामि गंगे परियोजना  | नमामि गंगे योजना मिशन 

Namami gange yojana – सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक गंगा संरक्षण मिशन को शुरू किया है। गोमुख से लेकर हरिद्वार के सफर के दौरान गंगा 405 किलोमीटर का सफर तय करती है। अपने किनारे बसे 15 शहरों और 132 गांवों के कारण इनसे निकलने वाले कूड़ा-करकट से लेकर करोड़ों लीटर सीवरेज ने गंगा को मैला कर दिया है। इसके तहत 2017 से उत्तराखंड में गंगा की निर्मलता के लिए कोशिशें शुरू हुई और वर्तमान में 65 प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गंगा नदी की सफाई के लिए बजट को चार गुना करते हुए पर 2019-2020 तक नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दे दी और इसे 100% केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दिया।यह जानते हुए कि गंगा संरक्षण और गंगा को साफ़ करना १ बहुत बड़ी चुनौती है, इसलिए विभिन्न मंत्रालयों के बीच एवं केंद्र-राज्य के बीच बेहतर रिश्ते एवं कार्य योजना की तैयारी में सभी की भागीदारी बढ़ाने के साथ केंद्र एवं राज्य स्तर पर निगरानी तंत्र को बेहतर करने के प्रयास किये गए हैं।

Namami Gange Yojana ,गंगा संरक्षण अधिनियम 

अधिनियम 1860 के तहत राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर पांच स्तरीय संरचना की परिकल्पना की गई है, जो निम्नलिखित है-

  • माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गंगा परिषद का निर्माण।
  • जल शक्ति के माननीय केंद्रीय मंत्री (जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प विभाग) की अध्यक्षता में गंगा नदी पर अधिकार प्राप्त टास्क फोर्स (ETF)।
  • स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन (NMCG)।
  • राज्य गंगा समितियाँ और
  • राज्यों में गंगा और उसकी सहायक नदियों को समाप्त करने वाले प्रत्येक निर्दिष्ट जिले में जिला गंगा समितियाँ।
नमामि गंगे

Namami gange yojana के कार्यक्रम

कार्यक्रम के कार्यान्वयन को निम्नलिखित स्तरों में बाँटा गया है –

  • शुरूआती स्तर की गतिविधियों में (तत्काल प्रभाव दिखने के लिए)
  • मध्यम अवधि की गतिविधियों में (समय सीमा के 5 साल के भीतर लागू किया जाएगा)
  • लंबी अवधि की गतिविधियों में (10 साल के भीतर लागू किया जाएगा)

Namami gange yojana में होने वाले कार्य –

नमामि गंगे प्रोजेक्ट की 231 योजनाओं में गंगोत्री से शुरू होकर उत्तरप्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, बिहार और बंगाल में विभिन्न जगहों पर पानी के सवच्छ्ता का काम किया जाएगा। तालाबों का गंगा से जुड़ाव पर क्या असर होता है उसे भी देखा जाएगा। गंगा सफाई अभियान के लिए निम्नलिखित कार्य किये जाएंगे –

  • पुराने घाटों का जीर्णोद्धार।
  • नए घाट, चेंजिंग रूम, शौचालय, बैठने की जगह, , आक्सीडेशन प्लान्ट बायोरेमेडेशन प्रक्रिया से
  • सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्ट का निर्माण।
  • गंगा से लगे शहरों में एसटीपी का निर्माण।
  • गंगा व उसकी सहायक नदियोें के किनारे पौधरोपण।
  • रिवर-फ्रंट डेवलपमेंट का निर्माण (आधुनिकीकरण और नवीनीकरण)।
  • गंगा के किनारे पेड़ लगाएं जाएंगे।
  • स्नान घाट व श्मशान घाटों का निर्माण।
  • विभिन्न संगठनों व संस्थाओं की मदद से जनजागरुकता की जाएगी।
  • गंगा में गिरने वाले गंदे नालों की टैपिंग।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करे।

Namami gange yojana के लाभ  

  • 32 परियोजनाओं में से 871.74 करोड़ रुपए की कुल लागत वाली 20 परियोजनाएँ सीवर की स्वच्छता तथा उत्तराखंड के विभिन्‍न भागों में सफाई के कार्यों के निर्माण से संबंधित हैं।
  • छह परियोजनाएँ हरिद्वार में लागू की जाएंगी। इसके अंतर्गत जगजीतपुर और सराय में दो एसटीपी का निर्माण किया जाएगा। हरिद्वार की परियोजनाओं की कुल लागत 414.20 करोड़ रुपए है।
  • सभी परियोजनाओं के पूरे होने के बाद हरिद्वार और ऋषिकेश समेत उत्तराखंड के सभी प्रमुख शहरों का पानी बिना स्वच्छ हुए गंगा में नहीं जाएगा।
  • इसके अतिरिक्‍त उत्तरकाशी, मुनि की रेती, कीर्ति नगर, श्रीनगर, रुद्र प्रयाग, बद्रीनाथ, जोशीमठ, चमोली, नंद प्रयाग और कर्ण प्रयाग में सीवेज स्वच्छता परियोजनाओं की आधारशिलाएँ रखी गईं।
  • टिहरी गढ़वाल, रुद्र प्रयाग और चमोली में घाट विकास कार्यों के लिये आधारशिलाएं रखी गईं।
नमामि गंगे

Namami gange yojana (नमामि गंगे परियोजना) में कवर शहर

भारत के पांच राज्यों में नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू किया गया है-

  • उत्तरप्रदेश
  • झारखंड
  • उत्तराखंड
  • पश्चिम बंगाल
  • बिहार

नमामि गंगे प्रोजेक्ट निम्नलिखित शहरों में शुरू हुआ है-

  • बद्रीनाथ
  • जोशीमठ
  • गोपेश्वर
  • नंदप्रयाग
  • गोचर
  • कीर्तिनगर
  • मुनि की रेती
  • टिहरी
  • देवप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • उत्तरकाशी
  • श्रीनगर
  • ऋषिकेश
  • हरिद्वार

इन शहरों में 132 एमएलडी क्षमता के एसटीपी, 59 नालों की टैपिंग, 70 से ज्यादा स्नान घाट, विभिन्न स्थानों पर श्मशान घाट, स्नान घाटों का सौंदर्यीकरण समेत कई कार्य होने हैं। इनमें से कुछ हो चुके हैं, जबकि कुछ प्रगति पर हैं।

गंगा सफाई का कितना काम हो गया है?

केंद्र सरकार ने कहा है कि 305 परियोजनाओं की अनुमानित लागत के लिए 28,613.75 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। जिसमें से 109 परियोजनाओं को पूरा कर लिया गया है, जबकि बाकी परियोजनाओं का किसी ना किसी स्तर पर काम जारी है

गंगा की सफाई को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दावा किया है कि 2020 तक गंगा की सफाई 70 से 80 फीसदी पूरी हो चुकी होगी। मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित नए 151 घाटों के निर्माण में से महज 36 घाट ही अभी बनकर तैयार हुए है।

नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा योजना के अंतर्गत कुल 154 प्रोजेक्ट बनाए गए थे। इनमें से 2014-15 एवं 2016-17 के दौरान 71 योजनाओं को अनुमति प्रदान की गई। इनमें से 70 योजनाओं को अनुमति 26 दिन से लेकर 1,140 दिन की देरी के साथ मिली। शेष बची हुई 83 योजनाओं को आज भी अनुमति का इंतजार है।

Note- हमारी इस वेबसाइट का उद्देश्य आप तक सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओ की जानकारी पहुँचाना है। अगर आपको ये जानकारी सही लगे तो दूसरो के साथ भी साँझा कीजिये। कोई त्रुटि हो तो हमे जरूर बताए।

क्या है नमामि गंगे योजना?

नमामि गंगे एक गंगा संरक्षण मिशन है जिसे सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू की है।

नमामि गंगे योजना के लाभ क्या है?

गंगा की स्वच्छता के साथ साथ विभिन्न जगहों पर पानी के सवच्छ्ता का काम होगा। गंगा से लगे शहरों में डेवलपमेंट होगी।

Leave a Comment

47 − = 41

error: Content is protected !!