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बेटी बचाओ बेटी पढाओ

वैसे तो हम हर दिन तरक्की की और बढ़ रहे हैं| अपने सोच और आविष्कारों की बड़ी बड़ी बातें करते हैं| युद्ध का  क्षेत्र हो या वैज्ञानिक आविष्कारों का, हमने अपने देश को हर मुकाम पर सफलता की और आगे बढ़ता हुआ पाया है| कहने के लिए तो हम कहते है की लड़का लड़की एक समान हैं| लेकिन इनमे अंतर करने वाले हम ही हैं| लेकिन आज तक हम इस सोच को पूरी तरह लागू करने में असफल हैं| जब बात हमारी समाज की बेटियों की होती है, तो न जाने हमारे समाज और उसके ऊँचे सोच वालों को क्या हो जाता है | न जाने हमारी ये मॉडर्न सोच और समझ कहाँ ख़त्म हो जाती है की हम अपने ही समाज में लड्कियों की ईज्ज़त करना भूल जाते हैं और कन्या भ्रूण हत्या जैसी घोर अपराध को पनपने देते हैं|

0-6 वर्ष की आयु के बीच प्रति 1000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या के रूप में परिभाषित चाइल्ड सेक्स रेशियो (सीएसआर) में गिरावट की प्रवृत्ति 1961 से अब तक देखी जा रही है। 1991 में 945 से 927 तक गिरावट और 2011 में ये संख्या घटकर 918 ही रह गयी है जो की बहुत खतरनाक स्थिति है। CSR पूर्व जन्म का भेदभाव लैंगिक पक्षपातपूर्ण सेक्स चयन के माध्यम से प्रकट होता है, और लड़कियों के खिलाफ जन्म के बाद का भेदभाव, दोनों को दर्शाता है।

बस ऐसी ही हैरत और शर्मनाक समस्याओं को जड़ से मिटाने के लिए हमारे देश की मानन्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढाओ’ नामक योजना की शुरुवात की है | इस योजना या अभियान का मूल उद्देश्य देश की बेटियों को अपना जन्म सिद्ध अधिकार दिलाना और उन्हें पढ़ लिख कर कुछ कर दिखाने की मौका देना है|

हरियाणा के पानीपत में 22 जनवरी 2015, बुधवार को प्रधानमंत्री के द्वारा इस योजना की शुरुआत हुयी। ये योजना समाज में लड़कियों के महत्व के बारे लोगों को जागरुक करने के लिये है।

इस योजना का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 22 जनवरी 2015,  बुधवार को हरियाणा राज्य के पानीपत जिले में किया था। हरियाणा में इसलिए क्योंकि हरियाणा राज्य में उस समय 1000 लड़कों पर सिर्फ 775 लड़कियां ही थी। सबसे कम स्त्री-पुरुष अनुपात होने की वजह से हरियाणा के 12 जिलों (अंबाला, कुरुक्षेत्र, रिवारी, भिवानी, महेन्द्रगण, सोनीपत, झज्जर, रोहतक, करनाल, यमुना नगर, पानीपत और कैथाल) को चुना गया। इस योजना को शुरुआत में पूरे देश के 100 जिलों में जहां पर सबसे अधिक लिंगानुपात अंतर था वहां पर इस योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया गया और आगामी वर्षों में इसे पूरे देश में लागू किया गया।

लड़कियों की दशा को सुधारने और उन्हें महत्व देने के लिये हरियाणा सरकार 14 जनवरी को ‘बेटी की लोहड़ी’ नाम से एक कार्यक्रम मनाती है।

बेटी बचाओ बेटी पढाओ का उद्देश्य :

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के उद्देश्य (Objectives) कुछ इस प्रकार से हैं:

  • देश में लगातार कन्या भ्रूण हत्या जैसी अपराधों के कारण गिरती फीमेल सेक्स रेश्यो (Female Sex Ratio) को सुधारना ही बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान ही मूल उद्देश्य है|
  • इस मिशन के माध्यम से लड़का लड़की में अंतर करने की सोच को रोका जा सकता है।
  • बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का एक उद्देश्य महिला शसक्तीकरण भी है और ये महिलाओं की हक के लिए आवाज बुलंद करने का एक जरिया है|
  • इस अभियान से समाज को और बालिका साक्षरता के स्तर को बढ़ावा और प्रोत्साहन मिलेगा।
  • ये मिशन के जरिये लड़कियों को सुरक्षा और जीने की आज़ादी प्राप्त होगी।
  • इस मिशन के माध्यम से लड़कियों को उनका अधिकार दिलाने में मदद होगी।
  • इस अभियान से लिंग जांच की प्रक्रिया में रोक लाया जा सकता है।
  • बालिका पोषण व स्वास्थ्य के स्तर में सुधार होगा।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का सम्पूर्ण लक्ष्य है –

  1. कन्या भ्रूण हत्या का रोकथाम (Prevention of gender-biased sex-selective elimination)
  2. कन्याओं की सुरक्षा व समृद्धि (Ensuring survival & protection of the girl child)
  3. बालिकाओं की शिक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करना (Ensuring education & participation of the girl child)

UNICEF  ने भारत को बाल लिंग अनुपात ( Child Sex Ratio) में 195 देशों में से 41वाँ स्थान दिया है।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्कीम के लिए ऐसे तो कोई एप्लीकेशन नहीं है जहाँ जाके आप आवेदन कर सके. लेकिन इस योजना के तहत आप जब बैंक में अकाउंट खुलवाएंगे तब आपको जो भी डाक्यूमेंट्स चाहिए वो नीचे बताए गए है –
1) SSY खाता खुलवाने का फॉर्म
2) आवेदनकर्ता (बालिका) का जन्म प्रमाण पत्र
3) माता-पिता/अभिभावक का एड्रेस प्रूफ
4) गार्डियन/माता-पिता का पहचान पत्र

सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत खाता खुलवाने के लिए जो फॉर्म चाहिए उस फॉर्म को डाउनलोड करने के लिए नीचे क्लिक करे –

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ स्कीम के लिए सरकार ने एक app भी लॉन्च की है जिसे आप playstore से डाउनलोड क्र सकते है. Playstore  से app को डाउनलोड करने के लिए यहाँ क्लिक करे – डाउनलोड App लिंक

यह App C-DAC Hyderabad टीम द्वारा बनाया गया। इसमें अलग-अलग सेक्शन दिए गए हैं जैसे ‘Why’, ‘What’, ‘How’, ‘Where’, ‘Audio’, ‘Videos’, ‘Helpline’, ‘Suggest us’ आदि। इस app से आप अपनी कहानी भी शेयर कर सकते हैं (यदि आपके पास कोई प्रेरणादायक कहानी है तो) व इस योजना से जुड़ी वीडियो भी देख सकते हैं।

बेटी बचाओ-बेटी पढाओ के अवयव(components) –

बेटी बचाओ-बेटी पढाओ पर वकालत और मीडिया अभियान –
योजना के तहत, बालिका को मनाने और उसकी शिक्षा को सक्षम बनाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लड़कियों को समान अधिकारों के साथ इस देश के सशक्त नागरिक बनने के लिए भेदभाव के बिना जन्म, पोषण और शिक्षित किया जाए। पूरे देश में इस मुद्दे के बारे में जागरूकता पैदा करने और सूचना का प्रसार करने के लिए 360 ° मीडिया दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।

CSR पर चयनित लिंग क्रिटिकल जिलों में बहु-क्षेत्रीय हस्तक्षेप
योजना के तहत, सभी राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को कवर करते हुए चयनित 405 जिलों (मौजूदा 161 जिलों सहित) में बहु-क्षेत्रीय कार्रवाई एम / ओ एच एंड एफडब्ल्यू एंड एम / ओ एचआरडी के परामर्श से योजनाबद्ध हस्तक्षेप और क्षेत्रीय कार्यों पर ध्यान केंद्रित करेगी। मापने योग्य परिणाम और संकेतक सीएसआर में सुधार के लिए तत्काल ठोस बहु-क्षेत्रीय कार्रवाई के लिए संबंधित क्षेत्रों, राज्यों और जिलों को एक साथ लाएंगे।

निष्कर्ष

केंद्र व राज्य सरकारें बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ योजना को सफल बनाने के लिए अनेक प्रयास कर रही है । लोगों की मानसिकता बदलने का प्रयास कर रही है। कई संस्थाए इस प्रोग्राम में सहयोग कर रही है जैसे की  मीडिया समाचार पत्र पत्रिकाओं, रोल मॉडल, संगोष्ठी, नुक्कड़ नाटक एवं स्वयंसेवी संस्थाए आदि।

लिंग समानता के बिना नारी सशक्तिकरण की कल्पना करना अधूरा है। प्रशासन को कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए सख्त कदम उठाने होगे।समाज को बेटी के जन्म पर ख़ुशी मनाना, पैतृक संपत्ति में से उन्हें उचित हिस्सा मिलना, बाल विवाह पर रोक लगाना, माता – पिता के दाह संस्कार का हक़ बेटियों को भी प्रदान करना, रोजगारोन्मुखी शिक्षा व प्रशिक्षण देकर आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना व वित्तीय समावेशन में महिला भागीदारी को सुनिश्चित करना आवश्यक है ।

यदि केंद्र और राज्य सरकारें पूर्ण तत्परता से इस दिशा में प्रयास करेंगी तो धीरे धीरे सामाजिक व्यवस्था में निश्चित तौर पर परिवर्तन आएगा औत यह योजना बेटी बचाओ और महिला सशक्तिकरण की दिशा में जन आन्दोलन का प्रभावी माध्यम बनेगी ।

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Priya