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क्या है NRC और NPR में अंतर?

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के लागू होने के बाद पूरे देश में विद्रोह की आग लग गयी और लोग इसका जमकर विरोध कर रहे है। केंद्र सरकार CAA और NRC के बाद अब राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को लाने की तैयारी कर रही है। लोगो में NRC और NPR को लेकर बहुत सारी अवधारणाएँ है। चलिए जानते है की आखिर क्या है ये NRC और NPR ? दोनों में क्या सम्बन्ध है? और दोनों एक दूसरे से कैसे भिन्न है?

किस सरकार ने दिया NPR का विचार –

एनपीआर का विचार वर्ष 2009 में यूपीए के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा लाया गया था। लेकिन उस समय यह योजना उस समय लागू नहीं हो सकी क्यूंकि नागरिकों को सरकारी लाभों के हस्तांतरण के लिए सबसे उपयुक्त आधार प्रोजेक्ट का इससे टकराव हो रहा था।

क्या है NRC?

  • एनआरसी का उद्देश्य देश में अवैध नागरिकों की पहचान करना है।
  • NRC धर्म पर आधारित नहीं है।
  • NRC में सभी नागरिकों जो देश में रह रहे हों या देश के बाहर रह रहे हों का नाम और उनसे संबंधित जानकारी दर्ज होगी।
  • यह किसी भी गैरकानूनी अप्रवासी का पता लगाने का प्रयास करता है। कोई भी अप्रवासी चाहे वो किसी भी जाति, धर्म या प्रान्त से सम्बन्ध रखता हो, उसे निर्वासित कर देता है।
  • एनआरसी अभी सिर्फ 1 ही राज्य में लागू है। NRC को अभी सिर्फ असम में लागू किया गया है क्यूंकि एनआरसी ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर असम के अवैध प्रवासियों की पहचान की और उन्हें हिरासत में लिया।

NPR का मुख्य उद्देश्य –

2021 में होने वाली जनगणना के लिए सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। केंद्र सरकार ने NPR के तहत देशभर में घर-घर जाकर नागरिकों की जानकारी एकत्र करके इसके डेटाबेस को अपडेट करने की मंजूरी दे दी है। डेटाबेस को अपडेट करने का कार्य 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक किया जाएगा। इसमें देश के हर नागरिक की जानकारी दर्ज होगी। इस डेटा में जनसख्या के साथ नागरिको की बायोमीट्रिक जानकारी भी होगी। बायोमीट्रिक जानकारी के लिए नागरिको के आंखों की रैटिना और फिंगर प्रिंट लिए जाएंगे। जनगणना, 2021 दो चरणों में की जाएगी। पहले चरण में, हाउस-लिस्टिंग या हाउसिंग जनगणना का काम अप्रैल से सितंबर 2020 तक किया जाएगा। दूसरे चरण में, जनसंख्या की गणना 9 फरवरी से 28 फरवरी 2021 तक की जाएगी। जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 1 अक्टूबर 2020 होगी।

क्या है NPR?

  • एनपीआर देश के सामान्य निवासियों का एक रजिस्टर है। ये हर दस साल में होने वाली जनगणना का हिस्सा है।
  • इसमें नागरिकता अधिनियम, 1955 और नागरिकता नियम, 2003 के प्रावधानों के तहत नागरिको की जानकारी एकत्रित करना शामिल है।
  • एनपीआर का मुख्य उद्देश्य नागरिको की पहचान करके उसका डेटाबेस तैयार करना है।
  • हर निवासी जो भारत में रहता है उसे एनपीआर में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
  • NRC में देश के किसी क्षेत्र या इलाके में रहने वाले सभी निवासियों मतलब जो किसी इलाके में पिछले 6 महीने या उससे ज्यादा वक्त से रह रहा हो और जो आगे भी 6 महीने या उससे ज्यादा वहीं रहने की इच्छा रखता हो, की पहचान के लिए डेटाबेस तैयार करना है।
  • एनपीआर का काम असम को छोड़कर देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में होगा।
  • मोदी सरकार ने इन कार्यों के लिए 13,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें 8,754 करोड़ रुपये जनगणना और 3,941 करोड़ रुपये एनपीआर के लिए आवंटित किए गए हैं।
  • NPR में अंतिम निवास स्थान, पासपोर्ट नंबर, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर, वोटर आईडी कार्ड और मोबाइल नंबर को भी आंकड़ों के रूप में शामिल किया जा सकता है।

NPR का सरकार को फायदा –

  • सरकार के पास देश में रहने वाले हर निवासी की जानकारी होगी।
  • सरकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू करने के लिए और भविष्य के हिसाब से याेजनाओं का आकार और अन्य फैसलाें के लिए यह जानकारी आधार बनेगी।

क्या है NRC और NPR में अंतर?

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (NRC) में काफी अंतर है।
  • एनपीआर (NPR) का नागरिकता से कोई लेना-देना नहीं है। जबकि एनआरसी (NRC) में आपको अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।
  • एनआरसी (NRC) का उद्देश्य जहां देश में अवैध नागरिकों की पहचान करना है, वहीं 6 महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को एनपीआर (NPR) में आवश्यक रूप से पंजीकरण करना होगा।
  • बाहरी व्यक्ति भी अगर देश के किसी हिस्से में 6 महीने से रह रहा है तो उसे भी एनपीआर (NPR) में दर्ज कराना होगा।
  • एनपीआर (NPR) के तहत असम को छोड़कर देश के अन्य सभी क्षेत्रों के लोगों से संबंधित सूचनाओं का संग्रह किया जाएगा।
  • एनआरसी (NRC) असम में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सूची है जिसे असम समझौते को लागू करने के लिये तैयार किया गया है।
  • इसमें केवल उन भारतीयों के नाम को शामिल किया गया है जो 25 मार्च, 1971 के पहले से असम में रह रहे हैं।
  • उसके बाद असम आने वालों को बांग्लादेश वापस भेजा जा सकता है।

NPR में किन जानकारियों का विवरण होगा?

एनपीआर का उद्देश्य देश में हर सामान्य निवासी का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है। डेटाबेस में निम्नलिखित जानकारी के विवरण शामिल होंगे:
  • नागरिक का नाम
  • पिता का नाम
  • माता का नाम
  • घर के मुखिया से रिश्ता
  • पति या पत्नी का नाम (यदि विवाहित है)
  • लिंग
  • जन्म की तारीख
  • वैवाहिक स्थिति
  • जन्म स्थान
  • राष्ट्रीयता (घोषित के रूप में)
  • सामान्य निवास का वर्तमान पता
  • वर्तमान पते पर रहने की अवधि
  • स्थायी निवास पता
  • व्यवसाय
  • शैक्षणिक योग्यता

NRC और NPR के विरोध में कई राज्य –

कई राज्य NRC और NPR का विरोध कर रहे है। पश्चिम बंगाल, राजस्थान और केरल सरकार ने कह दिया है कि वे इसके खिलाफ हैं। बता दें कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) पर जल्द मोदी कैबिनेट की मुहर लग सकती है। एनपीआर (NPR) को मंजूरी मिलने के बाद देश के हर नागरिक के लिए इसमें में अपना नाम दर्ज कराना जरूरी होगा। एनपीआर (NPR) में ऐसे लोगों का रिकॉर्ड होगा, जो किसी इलाके में 6 महीने से रह रहे हों। हर नागरिक के लिए रजिस्टर में नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा। अटल टनल योजना की जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करे। क्या है FasTag?– जानने के लिए लिंक पर क्लिक करे। LIC/एलआईसी कन्यादान पॉलिसी के बारे में जानने के लिए लिंक पर क्लिक करे। आधार को पैन कार्ड से कैसे लिंक करे ? – जानने के लिए लिंक पर क्लिक करे। हमारी इस वेबसाइट का उद्देश्य आप तक सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी योजनाओ की जानकारी पहुँचाना है। अगर आपको ये जानकारी सही लगे तो दूसरो के साथ भी साँझा कीजिये। कोई त्रुटि हो तो हमे जरूर बताए।
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Priya